”किसानों का सेवक हूँ, खेती और किसान के सम्मान पर कभी आंच नहीं आने दूँगा”: तरावड़ी में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान
धरती माँ के स्वास्थ्य की रक्षा और संतुलित खाद के उपयोग का शिवराज सिंह ने किया आह्वान: “देखा-देखी में नहीं, स्वाइल हेल्थ कार्ड से करें खेती”
”प्राकृतिक खेती घाटे का सौदा नहीं, विधिपूर्वक करें तो मिलता है भरपूर लाभ”: शिवराज सिंह चौहान ने साझा किया निजी खेती का अनुभव
पराली प्रबंधन में हरियाणा के किसानों की मिसाल: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए की खुले दिल से सराहना
संतुलित पोषण, प्राकृतिक खेती और उन्नत पशुपालन से संवरेगा किसानों का भविष्य- शिवराज सिंह चौहान

करनाल (हरियाणा)/ नई दिल्ली, 22 अक्टूबर 2026, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज हरियाणा के करनाल जिले स्थित ऐतिहासिक तरावड़ी से राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर आयोजित आत्मीय ‘किसान चौपाल’ में केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने अन्नदाताओं से सीधा संवाद स्थापित करते हुए कहा कि किसानों की सेवा ही उनके लिए ईश्वर की सबसे बड़ी पूजा है। उन्होंने दोहराया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में किसान और किसानी के मान-सम्मान व स्वाभिमान की रक्षा केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। कार्यक्रम में हरियाणा के कृषि मंत्री श्री श्याम सिंह राणा, स्थानीय विधायक, आईसीएआर व एनडीआरआई के शीर्ष कृषि वैज्ञानिक तथा बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।
चौपाल की शुरुआत करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने उपस्थित किसानों से कहा कि वे स्वयं को किसी ऊंचे पद पर आसीन नेता नहीं, बल्कि किसानों का सेवक और स्वयं एक समर्पित किसान मानते हैं। उन्होंने कहा, “यह पगड़ी किसान के मान और स्वाभिमान का प्रतीक है, जिसे कभी झुकने नहीं दिया जाएगा। आज समय की मांग है कि हम आधुनिकता और परंपरा का ऐसा समन्वय बनाएं जिससे हमारी धरती भी बचे और किसान की जेब भी भरे।”
देखा-देखी नहीं, स्वाइल हेल्थ कार्ड के आधार पर हो संतुलित खाद का उपयोग
संवाद के दौरान रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि खेत बचाओ अभियान किसी खाद का अंधाधुंध विरोध करने के लिए नहीं, बल्कि उसके संतुलित और वैज्ञानिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए है। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि बिना बीमारी के जिस तरह कैल्शियम की गोलियां खाने से शरीर को नुकसान होता है, उसी तरह बिना जरूरत के रासायनिक खाद झोंकने से धरती की उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही है। उन्होंने किसानों से अपील की, “रामलाल ने चार कट्टे डाले तो श्यामलाल साढ़े चार कट्टे डाले- इस देखा-देखी की होड़ से बाहर निकलें। पहले स्वाइल हेल्थ कार्ड से मिट्टी की जांच कराएं और जितनी आवश्यकता हो, उतना ही संतुलित पोषण दें। इससे लागत भी घटेगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए धरती की सेहत भी सुरक्षित रहेगी।”
प्राकृतिक खेती का आह्वान: ‘कम से कम एक एकड़ से विधिपूर्वक करें शुरुआत’
प्राकृतिक खेती को लेकर किसानों की शंकाओं का समाधान करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने अपने स्वयं के खेतों का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि वे स्वयं अपने खेत में उतरते हैं, सब्जियां, फल और फसलें उगाते हैं और प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन तभी बेहतर मिलता है जब उसे वैज्ञानिक और सही विधि से किया जाए। जीवामृत, घनजीवामृत और बीजामृत का सही अनुपात और सही समय पर उपयोग ही इसकी सफलता की कुंजी है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि यदि किसी के पास तीन या पांच एकड़ जमीन है, तो वह पहले केवल एक एकड़ में पूरी विधि सीखकर प्राकृतिक खेती शुरू करे। जब लाभ दिखेगा, तो बाकी किसान भी स्वतः प्रेरित होंगे।
देसी गोवंश और लिंग-वर्गीकृत वीर्य (Sexed Semen) तकनीक पर चर्चा
चौपाल में किसानों ने देसी गायों के संरक्षण, दुग्ध मूल्य और बछिया पैदा करने वाली उन्नत तकनीकों (Sex-sorted semen) का विषय उठाया। इस पर वैज्ञानिकों की उपस्थिति में चर्चा करते हुए आश्वस्त किया गया कि सरकार ऐसी सस्ती व सुलभ तकनीक को तेजी से मान्य (वैलिडेट) कर रही है जिससे किसानों को वाजिब दरों पर यह सुविधा मिले। साथ ही, देसी गाय के दूध के बेहतर बाजार मूल्य और प्राकृतिक खेती में गोमूत्र व गोबर की केंद्रीय भूमिका पर भी बल दिया गया।
पराली प्रबंधन में हरियाणा के किसानों की भूरि-भूरि प्रशंसा
केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान ने इस वर्ष हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में आई भारी गिरावट और किसानों की सजगता की दिल खोलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि जिस मौसम में पहले चारों ओर धुआं और धुंध छाई रहती थी, इस बार हरियाणा के किसानों ने पराली प्रबंधन और सुपर सीडर जैसी तकनीकों को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण की जो मिसाल पेश की है, वह पूरे देश के लिए अनुकरणीय है। यह जनता, किसानों और सरकार के साझा संकल्प की शानदार जीत है।
तरावड़ी की यह किसान चौपाल केवल एक औपचारिक संवाद नहीं, बल्कि सीधे खेत-खलिहान से उपजी समस्याओं और उनके वैज्ञानिक समाधान का एक जीवंत मंच साबित हुई। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने भरोसा दिलाया कि किसानों से मिले हर सुझाव और आवश्यकता पर कृषि मंत्रालय तत्परता से ठोस कदम उठाएगा।
Prominent Journalist Amritpal Singh
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As a senior journalist and Director of Chardikala Time TV, he has played a vital role in strengthening Punjabi media at a global level.










