
समाचार 18 न्यूज़ के लिए रोहित टंडन की खास रिपोर्ट
सीकर के नबीपुरा गांव की नेहा राबिया ने UPSC 2025 में सफलता पाई. गांव में जोरदार स्वागत हुआ, 20 किमी लंबी वाहन रैली निकाली गई. नेहा गांव की पहली IAS बनीं. गांव के लोगों ने अपनी बेटी का स्वागत ऐसे किया जैसे वह कोई बड़ी जीत हासिल कर घर लौटी हो.
सीकर. सीकर जिले के फतेहपुर इलाके के छोटे से गांव नबीपुरा की बेटी नेहा राबिया ने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में सफलता हासिल कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया है. ग्रामीण परिवेश से निकलकर आईएएस बनने वाली नेहा राबिया जब पहली बार अपने गांव लौटीं तो पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला.
गांव के लोगों ने अपनी बेटी का स्वागत ऐसे किया जैसे वह कोई बड़ी जीत हासिल कर घर लौटी हो. नबीपुरा ही नहीं बल्कि आसपास के गांवों में भी खुशी की लहर दौड़ गई. नेहा के स्वागत के लिए गांव में विशेष तैयारियां की गई थीं और हर कोई अपनी बेटी की इस उपलब्धि पर गर्व करता नजर आया.
जोरदार स्वागत और 20 किलोमीटर लंबी वाहन रैली
जैसे ही नेहा राबिया गांव की सीमा में पहुंचीं, ग्रामीणों ने उनका जोरदार स्वागत किया. जगह-जगह फूल मालाओं से उनका अभिनंदन किया गया और ढोल-नगाड़ों के साथ लोगों ने अपनी खुशी जाहिर की. महिलाओं ने मंगल गीत गाकर उनका स्वागत किया. इस अवसर पर करीब 20 किलोमीटर लंबी वाहन रैली भी निकाली गई. रैली में बड़ी संख्या में ग्रामीण अपने वाहनों के साथ शामिल हुए और पूरे उत्साह के साथ अपनी खुशी व्यक्त की. रास्ते में कई स्थानों पर लोगों ने रुक-रुककर नेहा का स्वागत किया. आसपास के कई गांवों के लोग भी इस आयोजन में शामिल हुए और फूल बरसाकर उनका सम्मान किया.
गांव की पहली आईएएस बनी नेहा राबिया
ग्रामीणों का कहना है कि यह उनके गांव के लिए बेहद गर्व का क्षण है. पहली बार नबीपुरा गांव की कोई बेटी आईएएस बनी है. नेहा राबिया की इस उपलब्धि ने गांव के साथ-साथ पूरे क्षेत्र को नई पहचान दिलाई है. ग्रामीणों का मानना है कि नेहा की सफलता से गांव की अन्य बेटियों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी. अब गांव के परिवार अपनी बेटियों की पढ़ाई और करियर को लेकर और अधिक जागरूक हो रहे हैं.
पारंपरिक गीतों से किया स्वागत
नेहा राबिया ने अपनी शुरुआती पढ़ाई सीकर से की और यहीं से 12वीं कक्षा पास की. इसके बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली का रुख किया. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की और यहां छात्र संघ अध्यक्ष भी रही. इसके बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की और कठिन परिश्रम के बल पर देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक में सफलता हासिल की. उनकी इस उपलब्धि पर परिवार के साथ-साथ पूरे गांव को गर्व है. गांव में उनके स्वागत के दौरान हर तरफ उत्साह और खुशी का माहौल दिखाई दिया. महिलाएं मंगल गीत गाती नजर आईं, जबकि युवाओं ने वाहन रैली में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.
