गन्ना किसानों को राहत देने की तैयारी, केंद्र सरकार ने प्रो. रमेश चंद की अध्यक्षता में बनाई समिति
गन्ने के लाभकारी मूल्य में बढ़ोतरी, चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में संशोधन और तौल प्रक्रिया में पारदर्शिता जैसे मुद्दों की होगी समीक्षा। समिति किसानों, चीनी मिलों और राज्य सरकारों से चर्चा कर अपनी सिफारिशें देगी।
केंद्र सरकार ने गन्ना किसानों की समस्याओं और चीनी उद्योग से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार करने के लिए एक नई समिति का गठन किया है। नीति आयोग के पूर्व सदस्य और कृषि अर्थशास्त्री प्रो. रमेश चंद को इस समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। समिति का मुख्य उद्देश्य गन्ना किसानों की मांगों की समीक्षा करना और उनके हितों की रक्षा के लिए व्यावहारिक समाधान सुझाना है।
समिति गन्ने के लाभकारी मूल्य में बढ़ोतरी, चीनी के एक्स-मिल न्यूनतम बिक्री मूल्य में संशोधन, गन्ने की तौल में पारदर्शिता और चीनी मिलों में रिकवरी मापने की व्यवस्था जैसे विषयों पर विचार करेगी। इन मुद्दों का सीधा संबंध किसानों की आय, गन्ना भुगतान और चीनी उद्योग की आर्थिक स्थिति से है।
गन्ने के लाभकारी मूल्य में बढ़ोतरी की मांग पर विचार
गन्ना किसानों की प्रमुख मांगों में फसल का उचित मूल्य सुनिश्चित करना शामिल है। खेती की लागत, खाद-बीज की कीमतों, मजदूरी और अन्य कृषि खर्चों में होने वाले बदलाव के कारण किसान लंबे समय से बेहतर मूल्य निर्धारण की मांग करते रहे हैं।
ऐसे में समिति गन्ने के लाभकारी मूल्य की समीक्षा करते समय उत्पादन लागत और अन्य संबंधित आर्थिक पहलुओं का आकलन करेगी। इसके आधार पर किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए आवश्यक कदमों की सिफारिश की जा सकती है।
हालांकि, समिति की सिफारिशों के बाद ही आगे की कार्रवाई पर फैसला होगा। फिलहाल इसके गठन का उद्देश्य विभिन्न मांगों और समस्याओं का व्यवस्थित तरीके से मूल्यांकन करना है।
चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में संशोधन की समीक्षा
समिति चीनी के एक्स-मिल न्यूनतम बिक्री मूल्य में बदलाव की मांग पर भी विचार करेगी। एक्स-मिल मूल्य वह कीमत है जिस पर चीनी मिल से चीनी की बिक्री की जाती है।
इस विषय की समीक्षा के दौरान चीनी उत्पादन की लागत, बाजार में चीनी की कीमतों और मिलों की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखा जाएगा। चीनी की बिक्री से होने वाली आय का असर मिलों की भुगतान क्षमता पर पड़ता है, इसलिए इस मुद्दे को गन्ना किसानों के हितों से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
समिति इन सभी पहलुओं का विश्लेषण कर यह सुझाव देगी कि मूल्य निर्धारण की मौजूदा व्यवस्था में किसी बदलाव की आवश्यकता है या नहीं।
गन्ने की तौल और चीनी रिकवरी में पारदर्शिता पर जोर
गन्ना किसानों के लिए फसल की सही तौल और चीनी रिकवरी का सटीक आकलन बेहद महत्वपूर्ण है। इन प्रक्रियाओं में किसी तरह की गड़बड़ी होने पर किसानों के भुगतान और मिलों के साथ उनके हिसाब-किताब पर असर पड़ सकता है।
इसी को ध्यान में रखते हुए समिति चीनी मिलों में गन्ने से चीनी की रिकवरी मापने और उसकी रिपोर्ट तैयार करने की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करेगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि रिकवरी के आंकड़ों की जांच और सत्यापन के लिए पर्याप्त पारदर्शी प्रक्रियाएं मौजूद हैं या नहीं।
इसके अलावा, गन्ने की तौल में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के कैलिब्रेशन, निरीक्षण और सत्यापन की व्यवस्था का भी आकलन किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों की उपज का वजन सही तरीके से दर्ज हो और भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
मशीन से कटाई किए गए गन्ने की वजन कटौती की भी होगी जांच
समिति मशीनों से काटे गए गन्ने के वजन में की जाने वाली कटौती से संबंधित मौजूदा प्रथाओं की भी समीक्षा करेगी।
मशीनी कटाई के दौरान गन्ने के वजन में होने वाली वास्तविक कमी और उसके आधार पर की जाने वाली कटौती के बीच अंतर को समझना इस समीक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। समिति यह आकलन करेगी कि मौजूदा नियमों के तहत की जाने वाली कटौती उचित है या उसमें बदलाव की जरूरत है।
इस व्यवस्था का किसानों को मिलने वाले अंतिम भुगतान पर क्या वित्तीय प्रभाव पड़ता है, इसका भी विश्लेषण किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर समिति इससे जुड़े अन्य मुद्दों को भी अपनी समीक्षा में शामिल कर सकती है।
किसान संगठनों और राज्य सरकारों से लिया जाएगा सुझाव
समिति अपनी रिपोर्ट तैयार करने से पहले संबंधित पक्षों से परामर्श करेगी। इसमें गन्ना किसान प्रतिनिधि, चीनी मिलों के संगठन, राज्य सरकारें, विशेषज्ञ और संबंधित संस्थान शामिल होंगे।
विभिन्न पक्षों के सुझावों और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर समिति अपनी समीक्षा पूरी करेगी। इसके बाद वह निष्कर्षों के साथ विशिष्ट सिफारिशें प्रस्तुत करेगी, जिन पर संबंधित सक्षम प्राधिकारी विचार करेगा। सरकार ने समिति को जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा है।
समिति का गठन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री के साथ कर्नाटक और महाराष्ट्र के गन्ना किसान प्रतिनिधियों की बैठक में लिए गए निर्णयों के बाद किया गया है।
कौन हैं समिति के अध्यक्ष प्रो. रमेश चंद?
प्रो. रमेश चंद कृषि अर्थशास्त्र और कृषि नीति के क्षेत्र में लंबे समय से काम कर रहे हैं। वह वर्ष 2015 से 2026 तक नीति आयोग के सदस्य रहे हैं। इससे पहले वह भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत राष्ट्रीय कृषि अर्थशास्त्र एवं नीति अनुसंधान संस्थान (NIAP) के निदेशक के रूप में कार्य कर चुके हैं।
वह 15वें वित्त आयोग के सदस्य भी रह चुके हैं। कृषि विकास, खाद्य सुरक्षा, कृषि बाजारों और मूल्य निर्धारण जैसे विषयों पर उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें इस समिति की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
गन्ना किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह समिति?
गन्ने का उचित मूल्य, समय पर भुगतान और तौल में पारदर्शिता किसानों की आर्थिक स्थिति से सीधे जुड़े मुद्दे हैं। दूसरी ओर, चीनी मिलों की उत्पादन लागत और बिक्री मूल्य भी उद्योग की वित्तीय स्थिरता को प्रभावित करते हैं।
ऐसे में समिति की सिफारिशें किसानों और चीनी उद्योग के बीच संतुलन बनाने में उपयोगी हो सकती हैं। हालांकि, किसानों को वास्तविक राहत कितनी मिलेगी, यह समिति की रिपोर्ट और उसके आधार पर सरकार द्वारा लिए जाने वाले फैसलों पर निर्भर करेगा।
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Prominent Journalist Amritpal Singh
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