चंडीगढ़ 22.10.2026: आज आयोडीन अल्पता विकारों (IDDs) की रोकथाम के लिए पिछले तीन सप्ताह से चल रही गतिविधियों का समापन इस संदेश के साथ किया गया कि “अब समय आ गया है कि हम आत्मचिंतन करें, नागरिकों को जागरूक एवं संवेदनशील बनाएं तथा अपने शहर के नागरिकों को आयोडीन अल्पता विकारों को समाप्त करने की दिशा में व्यक्तिगत जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करें।” इस अवसर पर स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक-सह-राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के मिशन निदेशक डॉ. सुमन सिंह मुख्य अतिथि थे। डॉ. रंजना मेहता, कार्यक्रम अधिकारी, राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण कार्यक्रम (NIDDCP) ने यू.टी. चंडीगढ़ के आयोडीन अल्पता विकार प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित विभिन्न गतिविधियों तथा कार्यक्रम की उपलब्धियों के बारे में उपस्थित जनसमूह को जानकारी दी। स्वास्थ्य सेवा निदेशालय (DHS) ने कार्यक्रम अधिकारियों, चिकित्सा अधिकारियों, यू.टी. चंडीगढ़ के विभिन्न सरकारी विद्यालयों के स्वास्थ्य शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को संबोधित किया।
आयोडीन अल्पता विकार विश्वभर में जनस्वास्थ्य की एक प्रमुख समस्या है। भारत में प्रत्येक पांच में से एक व्यक्ति आयोडीन अल्पता विकार से प्रभावित स्थानिक क्षेत्रों में निवास करता है। अनुमान है कि विश्वभर में लगभग 1.5 अरब लोग तथा 20 करोड़ से अधिक लोग आयोडीन अल्पता विकारों के जोखिम में हैं। भारत में ही 7.1 करोड़ से अधिक लोग घेंघा रोग तथा अन्य आयोडीन अल्पता विकारों से पीड़ित हैं। एक व्यक्ति के लिए आयोडीन की सामान्य दैनिक आवश्यकता 100 से 150 माइक्रोग्राम तथा गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए 200 माइक्रोग्राम है। आयोडीन के प्रमुख स्रोतों में समुद्री खाद्य पदार्थ, समुद्री मछली, समुद्री शैवाल तथा कॉड लिवर ऑयल शामिल हैं। दूध, अनाज एवं सब्जियों में भी आयोडीन की थोड़ी मात्रा पाई जाती है।
आयोडीन की कमी से अनेक प्रकार के शारीरिक एवं मानसिक विकार उत्पन्न होते हैं, जो मानव जीवन के प्रत्येक चरण को प्रभावित करते हैं। भ्रूण अवस्था में आयोडीन की कमी से गर्भपात, मृत शिशु का जन्म, जन्मजात विकृतियां, प्रसवकालीन मृत्यु दर में वृद्धि, मानसिक मंदता, बहरापन, गूंगापन, पक्षाघात तथा भेंगापन आदि का जोखिम बढ़ जाता है। बच्चों में नवजात घेंघा रोग, हाइपोथायरायडिज्म, शारीरिक एवं मानसिक विकास में बाधा, बुद्धिलब्धि (IQ) में कमी, विद्यालय में खराब प्रदर्शन तथा गंभीर मामलों में क्रेटिनिज्म जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वयस्कों में शारीरिक कार्यक्षमता में कमी, उत्पादकता में गिरावट तथा घेंघा रोग और उससे जुड़ी जटिलताएं देखने को मिलती हैं।
जीएमएसएच-16, चंडीगढ़ के स्त्री रोग एवं बाल रोग बाह्य रोगी विभागों (OPDs) में आयोडीन युक्त नमक के पर्याप्त एवं उचित उपयोग के संबंध में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता वार्ताएं आयोजित की गईं। इसके अतिरिक्त, गर्भवती महिलाओं में मूत्र के माध्यम से आयोडीन उत्सर्जन की जांच के लिए उनके मूत्र के नमूने एकत्र किए गए।
पिछले तीन सप्ताह के दौरान यू.टी. चंडीगढ़ के स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों में नमक में आयोडीन की मात्रा की जांच करने तथा नमक के आयोडीनीकरण के स्तर का पता लगाने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया।
चंडीगढ़ के विभिन्न सरकारी विद्यालयों में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के चिकित्सकों द्वारा जागरूकता व्याख्यान दिए गए। नमक एवं मूत्र के नमूने एकत्र कर राज्य आयोडीन अल्पता विकार प्रयोगशाला में उनकी जांच की गई। राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण कार्यक्रम (NIDDCP) प्रकोष्ठ द्वारा यू.टी. चंडीगढ़ के विभिन्न सरकारी विद्यालयों में अनेक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर-33, चंडीगढ़ के विद्यार्थियों ने आयोडीन अल्पता विकारों तथा आयोडीन युक्त नमक के उचित उपयोग के संबंध में जन-जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। इस अवसर पर नुक्कड़ नाटक के विजेताओं एवं प्रतिभागियों को पुरस्कार और प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
Prominent Journalist Amritpal Singh
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