
रिपोर्ट रोहित टंडन समाचार 18 न्यूज़
नई दिल्ली, बेबी अरिहा का मामला अब सिर्फ एक परिवार की कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि भारत और जर्मनी के बीच एक बड़ा भावनात्मक मुद्दा बन गया है. बच्ची के लिए अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीधे जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज़ से बात की है. आखिर क्यों 5 साल की अरिहा अपने ही मां-बाप से दूर जर्मनी के एक फोस्टर केयर में रहने को मजबूर है? क्यों यौन शोषण के आरोप गलत साबित होने के बाद भी उसे भारत नहीं भेजा जा रहा? आखिर पेंच कहां फंसा है?
कल्पना कीजिए एक ऐसी मां की, जिसकी गोद से उसकी सात महीने की दूधमुंही बच्ची को छीन लिया जाए. कसूर सिर्फ इतना कि बच्ची को चोट लगी और मां-बाप उसे इलाज के लिए अस्पताल ले गए. विदेशी धरती, विदेशी कानून और विदेशी भाषा के बीच फंसी एक भारतीय मां पिछले कई सालों से अपनी बेटी का चेहरा देखने को तरस रही है. यह कहानी है ‘बेबी अरिहा’ की, जो जर्मनी के फोस्टर केयर (पालक माता-पिता) में बड़ी हो रही है, जबकि उसके असली माता-पिता भारत में दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं. यह मामला इतना संवेदनशील और पेचीदा हो गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुद जर्मनी के चांसलर ओलाफ शोल्ज़ से इस मुद्दे पर सीधी बात करनी पड़ी. विदेश मंत्रालय पूरी ताकत लगा रहा है, लेकिन जर्मनी का कानून बच्ची को भारत भेजने में आड़े आ रहा है. आखिर इस बच्ची के साथ हुआ क्या? अब उसकी स्थिति क्या है और क्या वह कभी भारत लौट पाएगी?
बेबी अरिहा शाह के माता-पिता, धरा शाह और भावेश शाह, गुजरात के रहने वाले हैं. भावेश शाह पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं. साल 2018 में भावेश को जर्मनी में एक अच्छी नौकरी मिली और वह पत्नी को साथ लेकर जर्मनी चले गए. सब कुछ ठीक चल रहा था. साल 2021 में बर्लिन में उनके घर एक नन्ही परी का जन्म हुआ, जिसका नाम रखा गया ‘अरिहा’. अरिहा के जन्म के बाद परिवार में खुशियों का माहौल था, लेकिन यह खुशी ज्यादा दिन नहीं टिकी.
1- सितंबर 2021 जब अरिहा महज 7 महीने की थी, एक दिन उसकी नानी उसे गोद में खिला रही थीं. तभी अचानक गलती से बच्ची को थोड़ी चोट लग गई. इसके कुछ समय बाद, मां धरा शाह ने बच्ची का डायपर बदलते समय उसमें खून देखा. घबराए हुए माता-पिता तुरंत अरिहा को नजदीकी अस्पताल ले गए. उन्हें लगा कि डॉक्टर इलाज करेंगे, लेकिन वहां जो हुआ, उसने उनकी जिंदगी बदल दी.
2- डॉक्टरों ने बच्ची की चोट को देखकर संदेह जताया. शुरुआत में स्थानीय अस्पताल ने इलाज किया, लेकिन बाद में बड़े अस्पताल रेफर कर दिया गया. वहां डॉक्टरों को शक हुआ कि बच्ची के साथ ‘सेक्सुअल प्रताड़ना’ हुई है. अस्पताल ने तुरंत जर्मनी की चाइल्ड प्रोटेक्शन एजेंसी ‘यूगेंडम्ट’ को सूचित कर दिया. इसके बाद यूगेंडम्ट ने बच्ची को माता-पिता से अलग कर अपनी कस्टडी में ले लिया. यहीं से शुरू हुई एक लंबी कानूनी लड़ाई.
3- यौन शोषण का आरोप हटा, फिर भी बच्ची क्यों नहीं मिली?
4- यह इस केस का सबसे बड़ा पेंच और विडंबना है. बच्ची को कस्टडी में लेने के बाद जर्मन पुलिस ने मामले की जांच शुरू की. डीएनए टेस्ट हुए, मेडिकल जांच हुई. जांच में यह साबित हो गया कि बच्ची के साथ कोई यौन शोषण नहीं हुआ था. साल 2022 की शुरुआत में पुलिस ने माता-पिता के खिलाफ क्रिमिनल केस बंद कर दिया. यानी धरा और भावेश शाह निर्दोष साबित हो गए. लेकिन, जर्मनी की ‘चाइल्ड लाइन सर्विस’ ने बच्ची को लौटाने से मना कर दिया.
5- उन्होंने कोर्ट में अपना पैंतरा बदला और एक नया सिविल केस दायर किया. एजेंसी ने कहा कि भले ही यौन शोषण नहीं हुआ, लेकिन माता-पिता ने बच्ची के साथ ‘हिंसक व्यवहार’ किया है या वे उसकी देखभाल करने में लापरवाही बरत रहे हैं. उन्होंने तर्क दिया कि बच्ची को जो चोट लगी, वह माता-पिता की लापरवाही का नतीजा थी. इस आधार पर कोर्ट ने माता-पिता के ‘पैरेंटिंग राइट्स’ यानी अभिभावक होने के अधिकार को खत्म कर दिया और बच्ची को फोस्टर केयर यानी देखभाल केंद्र में डाल दिया.
आखिर अब क्या उम्र है अरिहा की और अब वह कहां है
अरिहा का जन्म 2021 में हुआ था. यानी अब उसकी उम्र लगभग 5 साल होने को है. वह पिछले कई सालों से जर्मनी के एक फोस्टर केयर होम में रह रही है. उसे वहां जर्मन पालक माता-पिता की देखरेख में रखा गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह अब जर्मन भाषा सीख रही है और अपनी मातृभाषा गुजराती/हिंदी और भारतीय संस्कृति से पूरी तरह कट चुकी है. धरा शाह का सबसे बड़ा दर्द यही है कि उनकी बेटी एक जैन परिवार से है, लेकिन फोस्टर केयर में उसे मांसाहारी भोजन दिया जा रहा है, जो उनकी धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है. वह अपनी पहचान खोती जा रही है.
भारत की संसद से लेकर जर्मनी तक तक अरिहा की मां का संघर्ष
जब जर्मनी की अदालतों से निराशा हाथ लगी, तो धरा और भावेश शाह भारत लौट आए और उन्होंने भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई. हाल ही में, धरा शाह अपनी बेटी को वापस पाने की मांग को लेकर भारतीय संसद भवन पहुंचीं. धरा के आंसुओं ने संसद को भी हिला दिया. जया बच्चन समेत कई दलों की महिला सांसदों ने पार्टी लाइन से ऊपर उठकर धरा का समर्थन किया. सांसदों ने विदेश मंत्रालय से कड़े कदम उठाने की मांग की.
