
सुधा सिंह ब्यूरो चीफ सुल्तानपुर
सुल्तानपुर। बल्दीराय थाना क्षेत्र के बिघौली गांव में तेरहवीं कार्यक्रम के दौरान हुई फायरिंग में घायल दिलीप कुमार की लखनऊ में इलाज के दौरान मौत के बाद गुरुवार को गांव का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया। गम और गुस्से के बीच परिजनों ने पहले अंतिम संस्कार से साफ इनकार कर दिया, जिससे प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। हालांकि, घंटों चले मान-मनौव्वल और अधिकारियों के आश्वासन के बाद आखिरकार परिजन अंतिम संस्कार के लिए राजी हो गए।
बताया जाता है कि 9 अप्रैल की रात तेरहवीं के निमंत्रण को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गया। आरोप है कि इसी दौरान कुछ लोगों ने फायरिंग कर दी, जिसमें दिलीप कुमार सहित पांच लोग घायल हो गए थे। गंभीर हालत में दिलीप को लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया, जहां 16 अप्रैल को उसकी मौत हो गई।
गुरुवार को जब दिलीप का शव गांव पहुंचा तो परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, बुलडोजर कार्रवाई, 50 लाख रुपये मुआवजा, एक सदस्य को सरकारी नौकरी और शस्त्र लाइसेंस की मांग करते हुए अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। हालात को देखते हुए गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया, जिससे किसी भी अप्रिय स्थिति को रोका जा सके।
सूचना मिलते ही नायब तहसीलदार गुलाब सिंह और क्षेत्राधिकारी आशुतोष कुमार मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों से लंबी बातचीत की और उनकी मांगों को गंभीरता से लेते हुए उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने का भरोसा दिया। करीब कई घंटों की समझाइश के बाद परिजन शांत हुए और लिखित रूप में अपनी मांगें सौंपते हुए अंतिम संस्कार के लिए तैयार हो गए।
क्षेत्राधिकारी आशुतोष कुमार ने बताया कि मामले में मृत्योपरांत धारा 302 (हत्या) बढ़ा दी गई है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। वहीं प्रशासन ने पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता दिलाने का भरोसा दिलाया है।
घटना के बाद पूरे गांव में अभी भी तनाव का माहौल बना हुआ है। एहतियात के तौर पर बल्दीराय, धनपतगंज समेत कई थानों की पुलिस तैनात है, ताकि शांति व्यवस्था कायम रखी जा सके।

