चुनाव आते ही जागे जनसेवक, पांच साल तक सोती रही संवेदनाएं

जनता भूखी रही, चंगू-मंगू मलाई खाते रहे

परसेंटेज वाली राजनीति पर जनता का प्रहार

उत्तर प्रदेश ! विधानसभा चुनाव की आहट क्या मिली वर्षों से व्यस्त चल रहे माननीयों को अचानक वंचित लाभार्थियों की याद सताने लगी। जो जनता पूरे कार्यकाल में दफ्तरों के चक्कर काटती रही आज वही जनता माननीयों के ड्राइंग रूम की शोभा बनी हुई है।
पूरे पांच साल अपने चंगू-मंगू गैंग को ठेके, सप्लाई, सिफारिश और प्रतिशत की मलाई खिलाई गई। असली ठेकेदार या तो बेरोजगार होकर घर बैठ गए या फिर माननीय सिस्टम के चरणों में प्रतिशत चढ़ाकर काम लेने को मजबूर हुए।
ऐसे-ऐसे नए ठेकेदार पैदा हुए जिनकी योग्यता सिर्फ इतनी थी कि विधायक जी के काफिले में गाड़ी बढ़िया सजाते थे और जयकारा जोरदार लगाते थे। अब हाल ये है कि जो व्यक्ति कल तक महीनों चक्कर लगाकर थक जाता था आज वही अगर नाराज़ दिख जाए तो विधायक जी तुरंत भाई साहब बैठिए आपका काम अभी होगा मोड में आ जाते हैं। जनता भी मुस्कुरा रही है। क्योंकि चुनावी मौसम में अहंकार का ब्लड प्रेशर अपने आप लो हो जाता है।
हर पांच साल बाद यही फिल्म रिलीज होती है
पहले जनता को भूलो
फिर चुनाव आते ही जनता के चरण धोओ।
लेकिन इस बार जनता का मूड कुछ ज्यादा ही गर्म दिख रहा है। जनता की राय में अगर पुराने चेहरे दोबारा उतारे गए तो जीत की दहलीज पर फिलहाल सिर्फ दो नाम दिखाई पड़ते हैं। मो. ताहिर खान और राजेश गौतम। बाकी माननीयों के प्रति जनता का गुस्सा इतना है कि लोग विकास कम और व्यवस्था शुल्क ज्यादा याद कर रहे हैं।
जनता अब भाषण नहीं हिसाब मांग रही है।
और इस बार पोस्टर से ज्यादा चर्चा परसेंटेज की हो रही है।

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