हमारे जीवन में गुरु का स्थान माता-पिता से ऊंचा माना गया है: श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर पूजा माई

 

गुरु का शब्द का अर्थ है -अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला हमारे जीवन में गुरु का स्थान माता-पिता से भी ऊंचा मान गया है

दिल्ली। गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति का एक पावन पर्व है जो आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह दिन गुरु के प्रति श्रद्धा समर्पण और आभार प्रकट करने का अवसर होता है। गुरु शब्द का अर्थ -अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला हमारे जीवन में गुरु का स्थान माता-पिता से ऊंचा माना गया है, क्योंकि वे हमारे ज्ञान संस्कार और जीने की कला सीखाते है। किन्नर अखाड़े की श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर पूजा माई ने कहां कि गुरु पूर्णिमा का धार्मिक महत्व भी है। इस दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था जिन्होंने चारों वेदों का संकल्प किया था। इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। बौद्ध परंपरा में भी यह दिन विशेष है, क्योंकि भगवान बुद्ध ने अपने प्रथम शिष्यों को इसी दिन धर्म का उपदेश दिया था। उन्होंने कहा आज के दिन शिष्य अपने गुरु के चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। विद्यालयों,मठों, और आश्रमों में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन होता है। यह पर्व हमें यह याद दिलाता है कि सच्चा मार्गदर्शन और शिक्षा ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। गुरु पूर्णिमा का दिन हमें गुरु के महत्व को समझने और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का सुअवसर प्रदान करता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *