
रिपोर्ट रोहित टंडन नेशनल ब्यूरो हेड
प्रेमानंद महाराज से कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय के पिता कृष्ण चंद्र ठाकुर मिलने पहुंचे। यहां प्रेमानंद महाराज ने इंद्रेश उपाध्य की जमकर तारीफ की। कहा कि वह बेहद मृदु भाषी हैं। साथ ही लोगों को अपना बना लेते हैं।
मथुरा: उत्तर प्रदेश की पावन नगर मथुरा-वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय के पिता कृष्ण चंद्र ठाकुर जी ने वृंदावन स्थित राधा केली कुंज आश्रम में संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की। यह भेंट अत्यंत भावपूर्ण और आध्यात्मिक चर्चा से भरी रही, जिसका केंद्र बिंदु कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय का धार्मिक व्यक्तित्व और उनकी कथा शैली थी। प्रेमानंद महाराज ने कहा कि इंद्रेश उपाध्याय जी का स्वभाव ऐसा है कि लूट लेता है और वो एक बार जिसके पास जाते हैं, उसको अपना बना लेते हैं।
कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय के पिता कृष्ण चंद्र ठाकुर से मुलाकात के दौरान प्रेमानंद महाराज ने इंद्रेश उपाध्याय के प्रति अपना असीम स्नेह और आशीर्वाद व्यक्त किया। इंद्रेश उपाध्याय की दिल खोलकर प्रशंसा की। प्रेमानंद महाराज ने कृष्ण चंद्र ठाकुर जी से कहा, इंद्रेश हमारे हृदय हैं, वह सब वैष्णवों का हृदय हैं।

इंद्रेश उपाध्याय की वाणी में अमृत
उन्होंने इंद्रेश उपाध्याय के स्वभाव की प्रशंसा करते हुए कहा, इंद्रेश जी पर हमारे संत-महात्मा, वैष्णव, सब आत्मा की तरह प्यार करते हैं। उनका स्वभाव है कि लूट लेता है। एक बार जिसके पास गए, अपना बना लेते हैं। स्वभाव मृदु महा भागवत स्वरूप है। प्रेमानंद महाराज ने इंद्रेश उपाध्याय की वाणी और कथावाचन की शैली पर भी विशेष टिप्पणी की। उन्होंने कहा, आपकी ऐसी कृपा है, वाणी में अमृत विराजमान है। जब वह भागवत चर्चा करते हैं तो चित्त को एकाग्रता करनी नहीं पड़ती, चित्त स्वाभाविक एकाग्र हो जाता है।
