छाता मथुरा

उपजिलाधिकारी और तहसीलदार के खिलाफ छाता के अधिवक्ताओं को क्यों करना पड़ रहा है, धरना प्रदर्शन , पूछ रही है क्षेत्रीय जनता।
मथुरा जिले की छाता तहसील में आजकल भ्रष्टाचार चरम सीमा पर चल रहा है, इसको लेकर क्षेत्र की जनता बहुत ही व्याकुल और परेशान है आखिर इस भ्रष्टाचार का जिम्मेदार कौन ,, नीचे तबके से लेकर ऊपर तक के अगर सभी अधिकारी भ्रष्टाचारी हैं तो इसका जिम्मेदार कौन , अगर बात करें भ्रष्टाचार की तो भ्रष्टाचार को बुढ़ावा हम ही लोग देते हैं अधिकारियों की तो हिम्मत क्या वह एक धेला मांग ले। जब जनता से बिताती है आफत आती है ,तो उसे समय इस तहसील के अधिवक्ता गढ़ कुछ भी बोलने को तैयार नहीं होते हैं ,जब अपने पर आती है ,तो तो इसे इसे वर्चस्व की लड़ाई बना देते हैं।
छाता तहसील पर कुछ शुक्रवार को अधिवक्ताओं ने धरना देकर प्रशासन के खिलाफ सभी हदें पार कर दी हैं , आपको बता दें, नो वर्क छुट्टी का सत्र चल रहा है ,अभी कार्यों पर विराम लगा है, और ज्यादातर सभी अधिवक्ता गढ़ पदाधिकारी छुट्टी के सत्र में यात्रा पर हैं ,तो प्रदर्शन करने वाले कौन , क्या इस प्रदर्शन से भ्रष्टाचार कम होगा या अधिकारियों पर दबाव बनेगा छाता तहसील परिसर में वर्तमान में अब दो बार हैं और दोनों बारों के अध्यक्ष और सचिव सहित काफी अधिवक्तागढ़ यात्रा पर हैं ,बिना अध्यक्ष और पदाधिकारी के धरना प्रदर्शन आखिर क्या महत्व आखिर इस प्रदर्शन का क्या परिणाम होगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा,इस धरना प्रदर्शन को लेकर उप जिलाधिकारी वैभव गुप्ता ने बताया कि नो वर्क छुट्टी के दौरान छाता तहसील के कुछ अधिवक्ता नियम विरुद्ध तरीके से अनैतिक कार्य कराने के लिए एकजुट होकर प्रशासन पर दबाव बना रहे हैं, वही अधिवक्ता कल्याण एसोसिएशन के अध्यक्ष चौधरी पूरन सिंह ने बताया कि छाता बार और अधिवक्ता कल्याण एसोसिएशन के अधिवक्ता गढ़ अध्यक्ष टूर पर हैं, ऐसे में सूचना मिली के छत बार के कुछ अधिवक्ता तहसील में धरना पर है भ्रष्टाचार कोई नया मामला नहीं है। सभी जगह भ्रष्टाचार व्याप्त है ऐसा क्या आप आज आपात स्थिति में साथियों को निर्णय लेना पड़ा कि वह धरना पर बैठे। उन साथियों को अध्यक्ष और सचिव और अपने पदाधिकारी को डिसीजन लेने के लिए यात्रा से आ जाने देना चाहिए था, भ्रष्टाचार तो वहां कड़कड़डूमा बस है वास्तविकता यह है कि वहां पर कुछ कल कोर्ट के भेष में गलत व्यक्ति और भ्रष्टाचारी दल्ले हैं, ऐसे दो चार कुछ ही लोग हैं ज्यादा नहीं हैं,।
