दिल्ली। कांवड़ यात्रा कोई आम यात्रा नहीं, यह आस्था की यात्रा है। इसमें भोजन की शुद्धता और पवित्रता सर्वोपरि होती है। जब लाखों कांवड़िए हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने गांव-शहर लौटते हैं, तो वे न केवल धार्मिक नियमों का पालन करते हैं बल्कि पूरे मार्ग में भगवान शिव की सेवा भावना से चलते हैं। ऐसे में यदि कोई व्यापारिक हित के लिए अपने असली नाम और पहचान को छिपाकर नाम बदलकर दुकानदारी करता है, तो यह न केवल आस्था से खिलवाड़ है बल्कि हिंदू भावनाओं का अपमान भी है।विश्व हिन्दू महासंघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री योगी तेजपाल सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि – अगर किसी को व्यापार ही करना है तो अपने असली नाम से करे। नाम बदलकर दुकान खोलना धोखा है। यह पवित्र कांवड़ यात्रा का उपहास है। ऐसे लोगों से दूरी बनाना आवश्यक है, ताकि कांवड़ियों की आस्था को ठेस न पहुंचे।विश्व हिन्दू महासंघ के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री योगी तेजपाल सिंह ने आगे कहा कि – हम किसी के व्यापार के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन यदि कोई पहचान छुपाकर धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करेगा तो उसे उजागर करना ज़रूरी है। ऐसे लोगों को चाहिए कि वे अपने नाम की जगह, अपनी जड़ों की ओर लौटें – यानी घर वापसी करें। विश्व हिन्दू महासंघ उनका स्वागत करेगा।अब सवाल यह है कि जब दुकान ही खोलनी है तो ईमानदारी से क्यों नहीं? नाम बदलने की जरूरत आखिर क्यों पड़ती है? क्या इससे नीयत छिपाने की कोशिश नहीं झलकती? आस्था के इस मार्ग पर छल-प्रपंच की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।यह धर्मयात्रा है धोखाधड़ी का मंच नहीं।
