डॉ सलिल श्रीवास्तव और स्वजातीय बाबू का मेल,खुल रहा नित नया खेल

 

रिपोर्ट रोहित टंडन नेशनल ब्यूरो हेड चीफ़
सुल्तानपुर, मेडिकल कॉलेज सुलतानपुर में सफाई कर्मियों की भर्ती में बड़ा घोटाल
235 सफाईकर्मी, 160 अन्य नियुक्तियाँ, बिना विभागीय वर्गीकरण के जारी की गईं निविदाएं; जिम्मेदार चुप
सुलतानपुर। स्वशासी राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, सुलतानपुर में सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है। निविदा संख्या GEM/2025/B/6422130 के तहत 235 सफाईकर्मियों और 160 अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति प्रस्तावित की गई है, लेकिन पूरी प्रक्रिया में भारी अनियमितताओं के आरोप लग रहे हैं।सबसे गंभीर आरोप यह है कि इन सफाई कर्मचारियों को किस विभाग या क्षेत्र में तैनात किया जाएगा, इसका कोई स्पष्ट वर्गीकरण निविदा में नहीं दिया गया है। पेस्ट कंट्रोल और बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन जैसे अहम कार्यों को निविदा से बाहर कर देने के बावजूद, निविदा की कुल राशि में कोई संशोधन नहीं किया गया — जो संभावित वित्तीय गड़बड़ी की ओर इशारा करता है। शिकायतकर्ता राजेश कुमार सिंह का आरोप है कि प्रिंसिपल डॉ. सलिल कुमार श्रीवास्तव और बाबू अखिलेश श्रीवास्तव की मिलीभगत से कुछ खास कंपनियों को ठेका देने की तैयारी है। इनमें प्राइम क्लीनिंग सर्विसेज,ए.एन. कपूर जेनीटर्स प्राइवेट लिमिटेड,सन फैसिलिटीज प्रा.लि.,निर्मल फैसिलिटी कंपनियां शामिल हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि इन कंपनियों को पहले से ही अनुचित लाभ पहुंचाने की मंशा से निविदा की शर्तें तय की गईं हैं।वहीं, पीलीभीत के स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में व्यवस्था कहीं अधिक पारदर्शी और संतुलित है। 450 बेड वाले अस्पताल में केवल 225 सफाई कर्मचारियों की तैनाती की गई है, जिसमें मेडिसिन, बाल रोग, सर्जरी, मनोरोग, आईसीयू, ओपीडी, हॉस्टल और प्रशासनिक भवन आदि के लिए साफ तौर पर विभागीय वर्गीकरण किया गया है। राजेश कुमार सिंह ने इस पूरे मामले की शिकायत महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण (DGME) से की है और जांच की मांग की है। मामले के तूल पकड़ने के बावजूद, मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सलिल कुमार श्रीवास्तव ने अब तक मीडिया को कोई बयान नहीं दिया है। इस घोटाले ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या जांच के बाद दोषियों पर कोई कार्रवाई होगी? या यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा? जनता और मरीज दोनों जवाब की प्रतीक्षा कर रहे है…..।।

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