प्रेस विज्ञप्ति | 24 जुलाई 2026
राज्यसभा सांसद डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी को उनके संसद प्रश्न के उत्तर में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से प्राप्त जवाब ने लुधियाना के बुद्धा नाला में प्रदूषण की गंभीरता की पुनः पुष्टि की है तथा इस समस्या के समाधान के लिए पंजाब सरकार द्वारा अधिक प्रभावी और सख्त क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया है।
डॉ. साहनी ने बताया कि मंत्रालय के उत्तर के अनुसार, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने 13 जनवरी 2026 के अपने आदेश में पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) को निर्देश दिया था कि नियमों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई जाए तथा उसकी वसूली सुनिश्चित की जाए। उत्तर में यह भी बताया गया है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा किए गए बार-बार के निरीक्षणों में लुधियाना के सभी चार कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) निर्धारित अपशिष्ट निर्वहन मानकों का पालन करने में असफल पाए गए। इसके बाद सीपीसीबी ने पीपीसीबी को बुद्धा नाला में बिना उपचारित औद्योगिक अपशिष्ट के प्रवाह को तत्काल रोकने के निर्देश जारी किए।
डॉ. साहनी ने पंजाब सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति का स्वागत करते हुए कहा कि पीपीसीबी ने “प्रदूषक भुगतान सिद्धांत” के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों पर लगभग ₹21.18 करोड़ की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति भी लगाई है। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि समिति एक समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करे, जिसमें स्पष्ट रूप से निर्धारित जिम्मेदारियाँ, क्रियान्वयन की समय-सीमा, मापनीय लक्ष्य तथा नियमित प्रगति समीक्षा की व्यवस्था हो, ताकि बुद्धा नाला के पुनर्जीवन में अब और देरी न हो तथा धरातल पर ठोस और प्रभावी परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।
Prominent Journalist Amritpal Singh
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