नीट पेपर लिख़ को लेकर देश में आज के युवाओं ने आंदोलन किया किसको लोग जेन ji के नाम से पुकारते है. ये जेन ji शब्द लोगों बोलने में अच्छा लगता है और युवाओं को भी अपने को जेन ji कहलाना ज्यादा पसंद आता है. जेन ji शब्द बांग्लादेश और नेपाल में हुए युवाओं के आंदोलन के बाद उपजा शब्द है जिसने अपने देश में एक आंदोलन के जरिये सत्ता परिवर्तन करके दिखा दिया. जेन ji सबसे ज्यादा प्रचालित शब्दों में से एक है. जेन ji आंदोलनकारियों ने उस मोदी सरकार से अपनी मांगे मनवा ली. जिस सरकार के लिए आम जनता से लेकर विपक्ष कहता है की ये सरकार झुकने वाली नहीं है..
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ ये आंदोलन भी खत्म हो चुका है. आंदोलन भले ही खत्म हो चुका है. लेकिन वो अपने पीछे कई सवाल भी छोड़ गया है. जिसका वक़्त रहते जवाब सरकार को और समाज के साथ खुद को लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ कहलाने वाले मिडिया को ढूंढना होगा. सबसे पहले सरकार की बात कर लेते है. सरकार ने लोगों के विश्वास को खोया. सुरक्षा एजेंसी पर सवाल उठे. तो पैरा मिलटरी सैन्यकर्मियों के साथ दिल्ली पुलिस कर्मियों का विश्वास डगमगाया. सरकार को ऐसे असंगठित आंदोलन के पीछे उन शक्तियों को ढूंढना होगा. जो भीड़ जुटाने के साथ उन पर होने वाले खर्च को उठाते है. जेन ji के इस आंदोलन में उनके खान पान का विशेष ध्यान रखा गया. जैसे पिज्जा, बर्गर बिरयानी बेज,नॉन बेज, बिस्किट, चिप्स पीने के लिए बिसलेरी से भी महंगी फिल्डर 20 लीटर की पानी की बोतल, कोल्ड ड्रिंक, सुबह के वक़्त उबले हुए अंडे चाय फेन के साथ ब्रेड पकोडे के साथ समोसे. पहुंच रहे थे. ये कौन पहुंचा रहा था किसी को भी पता ऑनलाइन डिलीवरी वाले लेकर आते थे. जब उनसे पूछा की किस ने ऑर्डर दिया. तो उनका कहना होता था. कि ये तो ऑनलाइन ऑर्डर आया है कि इस पते पर और दिए हुए कांटेक्ट number पर पहुंचना है. मजे की बात तो ये है.कि डिलीवरी होने के साथ कांटेक्ट number डिस एक्टिवेट हो जाता था. ये एक बार नहीं हर दिन बल्कि हर डिलीवरी के बाद होता था. ये तो खाने पीने की बात हुई. धरना स्थल पर रुकने वालों को गर्मी से बचने के लिए नए नए तरीके की हजारों की संख्या में पंखिया, महिलाओं को जमीन पर बैठने के लिए फूक से हवा भरकर तकिया फोन चार्ज करने लिए पावर बैंक हजारों की संख्या में हर दिन पहुंच रहा था रात में रुकने वाले आंदोलकारियो को लेटने के लिए गद्दे मच्छर से बचने के लिए मच्छरदानी बड़ी संख्या में आते थे.सरकार को ऐसे उन धर्मात्माओं का पता लगाना होगा. जो ये खर्च उठा रहे थे.. अब जरा बात समाज की भी कर लेते है. ये बात सही है कि माता पिता बच्चे को जो संस्कार देते है. वो उन्ही संस्कारों को लेकर बड़ा होता है. कहा तो ये भी जाता है कि माँ ही बच्चे की पहली गुरु होती है. माँ बच्चे को जो सिखाती है बच्चा वही सीखता है.इस आंदोलन में माता पिता के युवाओं ने अपनी अभद्रता का खूब परिचय दिया. एक माता पिता अपने 3 साल के मासूम को उसकी तोतली आवाज़ में मोदी मादर…… की गाली देते हुए का वीडियो बना रहे थे. तो कई जेन ji अपने माता पिता के साथ देर रात पहुंच कर मोदी भा….. वा जैसी गंदी गाली देकर रील बना रहे थे. उनको शायद ही इस गंदी गाली का मतलब पता हो. जितने दिन आंदोलन चला. नशे का कारोबार भी यहां जमकर चला. रात रात भर युवक हो या फिर युवती ज्यादातर बड़ी बड़ी सिगरेट भरकर पीते दिख रहे है. कपड़ो के फुड़पन पर क्या कहना अगर उस कुछ बोल दिया या लिख दिया. तो यही जेन ji आपसे ही उल्टा सवाल करने लगेंगे. कि आप कौन होते है. हमारे कपड़ो को लेकर कहने वाले. हम स्वतंत्र है जो मर्जी जैस मर्जी कपड़े पहने. धरने के दौरान लोगों ने नारे लगाए हमें चाहिए आजादी ये समझ में नहीं आया जब आप आजाद हो कैसे भी अधनंगे कपड़े पहनने के लिए तो फिर किससे और कैसी और आजादी चाहिए. अब बात कुछ मीडिया की जो अपने आप को लोग का चौथा स्तंभ कहता है जिसे आज गोदी मिडिया भी कहा जाता है. यह गोदी मीडिया शब्द किसने दिया. यह शब्द उन तथाकथित बड़े-बड़े मीडिया संस्थानों में संपादक जैसे बड़े पदों पर लाखों की सैलरी ले चुके उन दलालों ने दिया. वो आज भी अपना यूट्यूब चैनल चला कर लाखों रुपए कमा रहे हैं.कुछ तो आज भी लाली पाउडर पोत कर स्टूडियो में टी पी पढ़कर अपने को महान पत्रकार बता रहे हैं आंदोलन के दौरान गोदी मीडिया शब्द का सामना उन पत्रकारों ने किया जो इनके एक चौथाई सैलरी पर आज 12 से 15 घंटे की शिफ्ट भूखा प्यासा धूप में खड़ा होकर नौकरी कर रहा है. अगर चैनल की टी आर पी बढ़ जाती भी तो कहते है कि आउटपुट वालों कने बढ़िया काम किया. जब टी आर पी घट जाती है.तो कहा जाता है कि रिपोर्टर काम नहीं करते. सबसे पहले उनके ही नौकरी पर तलवार लटक जाती है.. इन आंदोलकारियों को शायद ही पता होगा एक रिपोर्टर बनने के लिए उसको भी एग्जाम पास करना होता है इंटरव्यू पास करना होता है और उसके बाद एक कड़ी मेहनत करनी होती है तब जाकर वह एक अच्छा रिपोर्टर बनता है. इन आंदोलनकारियों की भीड़ ने शायद ही किसी कोई रिपोर्टर को छोड़ होगा जिसको गोदी मिडिया ना कहा हो. जिसके बतमीजी ना की हो. जिन पुलिस कर्मियों पर इन आंदोलनकारी ने पथराव किया आखिर वो भी तो किसी जेन ji पिता होंगे भाई होंगे या फिर जिन पत्रकारों के साथ बदतमीजी की गई उनके भी तो भाई बहन नाते रिश्तेदार जेन ji होंगे. इसलिए यह हम सभी को वक्त रहते सोचना होगा कि आखिर ये जेन ji किस दिशा में जा रहे हैं कहीं यह किसी के बहकावे में आकर तो कोई गलत कदम तो नहीं उठा रहे हैं.
Prominent Journalist Amritpal Singh
Significant Contributions to Journalism & Media
As a senior journalist and Director of Chardikala Time TV, he has played a vital role in strengthening Punjabi media at a global level.










