
प्रयागराज:नेहरू ग्राम भारती (मानित विश्वविद्यालय), जमुनीपुर, प्रयागराज के विशेष शिक्षा संकाय तथा दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में “दिव्यांगजन का समग्र सशक्तिकरण: चिकित्सीय, सामाजिक, शैक्षणिक एवं विधिक परिप्रेक्ष्य” विषय पर द्विदिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन अत्यंत गरिमामय एवं प्रेरक वातावरण में संपन्न हो रहा है।

इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगता के विविध प्रकारों, उनके कारणों, शीघ्र पहचान, निदान तथा चिकित्सीय पुनर्वास के प्रति समाज में जागरूकता उत्पन्न करना है। साथ ही सहायक उपकरणों, कृत्रिम अंगों, आधुनिक पुनर्वास तकनीकों, मानसिक स्वास्थ्य सहयोग, मनोसामाजिक देखभाल, समावेशी शिक्षा तथा सहायक आईसीटी उपकरणों की भूमिका को रेखांकित करते हुए दिव्यांगजनों के लिए शीघ्र हस्तक्षेप एवं प्रभावी पुनर्वास की आवश्यकता पर बल दिया गया।

कार्यशाला के प्रथम दिवस की मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता कमलाकांत पाण्डेय, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, सक्षम तथा सदस्य एवं सलाहकार, दिव्यांगता सलाहकार परिषद, भारत सरकार ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम–2016 की विधिक भाषा, उसके प्रभावी अनुपालन एवं अधिकार-आधारित दृष्टिकोण पर सारगर्भित वक्तव्य प्रस्तुत कर प्रतिभागियों को विधिक जागरूकता से सशक्त किया।

विशिष्ट अतिथि एवं वक्ता डॉ. नीता मिश्रा, सहायक आचार्य, राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज ने समावेशी शिक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 तथा दिव्यांग-अनुकूल शिक्षण व्यवस्थाओं पर प्रकाश डालते हुए शिक्षा को सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बताया।

विश्वविद्यालय के विशेष शिक्षा संकाय की सहायक आचार्य रश्मि मौर्य ने सामाजिक समावेशन एवं समुदाय आधारित पुनर्वास की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. दीपक त्रिपाठी, सहायक आचार्य, विशेष शिक्षा संकाय, नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय ने प्रारंभिक हस्तक्षेप, निदान एवं चिकित्सीय पुनर्वास के महत्व को विस्तार से रेखांकित किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुल सचिव श्यामसुंदर मिश्रा ने की। उन्होंने अपने उद्बोधन में अतिथियों का स्वागत, प्रतिभागी छात्र-छात्राओं एवं अभिभावकों का अभिनंदन करते हुए इस प्रकार के आयोजनों को सामाजिक चेतना एवं संवेदनशीलता का आधार बताया तथा अंत में सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की सांकेतिक भाषा अनुवादक, सहायक आचार्य अपराजिता पांडे द्वारा श्रवण बाधित प्रतिभागी विद्यार्थियों को सांकेतिक भाषा में समस्त सत्रों की जानकारी प्रदान की गई, जो समावेशी दृष्टिकोण का जीवंत उदाहरण रहा।
इस अवसर पर कृष्णानंद पांडेय, डॉ. विजय गुप्ता, डॉ. भूप नारायण, डॉ. आदिनाथ, शिल्पी देवी, अमित कुमार दुबे परिसर प्रभारी शोध केंद्र लोकेश कुमार त्रिपाठी सहित सैकड़ों छात्र-छात्राएं, अभिभावक एवं विश्वविद्यालय के कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में समाजशास्त्र विभाग से राकेश कुमार, विधि विभाग से आकर्ष विश्वकर्मा एवं प्रगति का योगदान उल्लेखनीय रहा।

उल्लेखनीय है कि इस द्विदिवसीय कार्यशाला का समापन सत्र 24 जनवरी को प्रातः 10:00 बजे प्रारंभ होगा, जिसमें दिव्यांगजन सशक्तिकरण की भावी दिशा एवं श्रेष्ठ व्यवहारों पर सार्थक विमर्श किया जाएगा।

