दुनिया आज कुछ ज़्यादा ख़तरे में आ गई है.

साल 2011 में दस साल के लिए हुए समझौते की अवधि 2021 में ख़त्म हुई, जिसे फिर से पाँच साल के लिए बढ़ाया गया था.
पिछले सितंबर में रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने इसे बढ़ाने का प्रस्ताव दिया था, पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प का कहना था कि इसमें चीन को भी शामिल करना चाहिए. उनका आरोप है कि चीन 2035 तक 1500 परमाणु हथियार बना लेगा.
कल अमेरिकी विदेश सचिव रुबियो ने ट्रम्प की ही बात को दोहराया था.
आशंका यह है कि 1500 हथियार की सीमा को अमेरिका अब नहीं मानेगा.
ग़ज़ब है कि अमेरिका यह आधिकारिक रूप से नहीं मानता है कि इज़रायल के पास बड़ी मात्रा में परमाणु हथियार हैं, लेकिन वह ईरान को शांतिपूर्ण योजनाओं के लिए भी यूरेनियम का शोधन नहीं करने देता है.
कल ओमान में ईरान और अमेरिका की बातचीत में यूरेनियम शोधन अमेरिका का मुख्य मुद्दा है यानी बातचीत असफल होगी.
परमाणु हथियार ख़राब हैं, पर सुरक्षा की गारंटी हैं. जो देश ऐसे हथियार बना सकते हैं, उन्हें बनाना चाहिए.
