राज कुमार चब्बेवाल की मानसिकता भू-माफियाओं जैसी — विजय सांपला
पंजाब सरकार स्पष्ट करे—क्या सरकारी जमीन पर कब्जे को प्रोत्साहित करना ही आम आदमी पार्टी की नीति है?
फगवाड़ा। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय सांपला ने होशियारपुर के सांसद डॉ. राज कुमार चब्बेवाल द्वारा कथित तौर पर एक सार्वजनिक मंच से दिए गए बयान “जो चीज सरकारी है, वह चीज हमारी है” तथा इंप्रूवमेंट ट्रस्ट, फगवाड़ा की ओर से अतिक्रमण हटाने के लिए जारी नोटिसों को फाड़कर फेंकने की बात कहे जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। सांपला ने कहा कि राज कुमार चब्बेवाल की ऐसी सोच भू-माफियाओं जैसी प्रतीत होती है। एक सांसद और जनप्रतिनिधि के पद पर बैठे व्यक्ति से इस तरह के बयान  आति निंदनीय है ।
विजय सांपला ने कहा कि सरकारी संपत्ति किसी नेता की निजी जागीर नहीं, बल्कि जनता की अमानत है। सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण को बढ़ावा देना और सरकारी नोटिसों को फाड़कर फेंकने की सलाह देना कानून के शासन को चुनौती देने जैसा है। यदि किसी व्यक्ति को प्रशासन की कार्रवाई पर आपत्ति है, तो उसके लिए न्यायालय और अन्य कानूनी मंच उपलब्ध हैं। किसी जनप्रतिनिधि को कानून की प्रक्रिया का सम्मान करने के बजाय लोगों को उसकी अवहेलना करने के लिए प्रेरित करना मवालियों की भाषा है न कि जनप्रतिनिधि की।
सांपला ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या पंजाब में कानून का शासन केवल आम नागरिकों के लिए है, जबकि सत्ताधारी पार्टी के सांसद और नेता अपनी सुविधा के अनुसार कानून की व्याख्या करेंगे? यदि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई गलत है, तो उसे कानूनी तथ्यों के आधार पर चुनौती दी जानी चाहिए। लेकिन यदि नोटिस नियमानुसार जारी किए गए हैं, तो किसी राजनीतिक नेता को उन्हें फाड़कर फेंकने के लिए कहना किस अधिकार के तहत उचित ठहराया जा सकता है?
सांपला ने कहा कि डॉ. राज कुमार चब्बेवाल होशियारपुर से सांसद हैं और आम आदमी पार्टी ने उन्हें फगवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के लिए अपना उम्मीदवार भी बनाया है। ऐसे में उनके बयान की गंभीरता और बढ़ जाती है। एक ओर सरकार प्रशासन को कानून के अनुसार कार्रवाई करने की जिम्मेदारी देती है, वहीं दूसरी ओर यदि सत्ताधारी दल के नेता ही लोगों को सरकारी नोटिसों की अवहेलना करने के लिए कहें, तो प्रशासन का मनोबल कैसे बना रहेगा? क्या ऐसे बयानों से सरकारी अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव नहीं बढ़ेगा और कानून का पालन करने वाले नागरिकों के मन में व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा नहीं होगा?
विजय सांपला ने पंजाब सरकार से पूछा कि क्या मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी नेतृत्व इस बयान से सहमत हैं? क्या सरकार अपने सांसद के कथित बयान का समर्थन करती है या फिर कानून और प्रशासनिक व्यवस्था के पक्ष में स्पष्ट रुख अपनाएगी? सरकार को इस मामले में चुप्पी साधने के बजाय जनता के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी सत्ता में आने से पहले व्यवस्था बदलने और ईमानदार शासन देने के बड़े-बड़े दावे करती थी। लेकिन यदि आज सरकारी संपत्ति और प्रशासनिक कार्रवाई जैसे गंभीर विषयों पर सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों की ओर से ऐसे बयान सामने आते हैं, तो सरकार की जवाबदेही तय होना आवश्यक है। सत्ता का अर्थ कानून से ऊपर होना नहीं, बल्कि कानून के प्रति अधिक जिम्मेदार होना है।
सांपला ने कहा कि पंजाब सरकार इस पूरे मामले पर अपना स्पष्ट पक्ष रखे, इंप्रूवमेंट ट्रस्ट, फगवाड़ा की ओर से जारी नोटिसों और संबंधित कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक करे तथा प्रशासन को बिना किसी राजनीतिक दबाव के कानून के अनुसार काम करने दे। यदि किसी प्रभावित व्यक्ति के साथ अन्याय हुआ है, तो उसे निष्पक्ष सुनवाई और कानूनी राहत मिलनी चाहिए; लेकिन किसी को भी सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जे को उचित ठहराने या कानून की अवहेलना के लिए प्रोत्साहित करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता।
विजय सांपला ने स्पष्ट कहा कि सरकारी संपत्ति जनता की संपत्ति है, किसी राजनीतिक दल की निजी जागीर नहीं। कानून सभी के लिए समान है और सांसद, मंत्री या मुख्यमंत्री—कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। भारतीय जनता पार्टी ऐसी सोच और ऐसे कथित बयान की कड़ी निंदा करती है तथा पंजाब सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग करती है।
Prominent Journalist Amritpal Singh
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