सितंबर 2026 में भारत के कुल वस्तु एवं सेवा निर्यात में सालाना आधार पर करीब 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस दौरान निर्यात बढ़कर 80.75 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जबकि आयात 8.19 प्रतिशत बढ़कर 94.05 अरब डॉलर रहा। व्यापार के आंकड़ों में जहां कई कृषि उत्पादों के निर्यात में मजबूती दिखाई दी, वहीं कुछ प्रमुख उत्पादों की विदेशी मांग में गिरावट भी दर्ज की गई। दूसरी ओर, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में उर्वरक, वनस्पति तेल, दाल और कपास के आयात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई।
भारत के कुल निर्यात और आयात में कितनी वृद्धि हुई?
सितंबर 2026 के दौरान भारत के कुल निर्यात में पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में 10.99 प्रतिशत की वृद्धि हुई। निर्यात का अनुमानित मूल्य 80.75 अरब डॉलर रहा। इसी अवधि में कुल आयात 8.19 प्रतिशत बढ़कर 94.05 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारत की गतिविधियां बढ़ीं। हालांकि, कृषि क्षेत्र के प्रदर्शन में सभी उत्पादों का रुझान एक जैसा नहीं रहा। कुछ श्रेणियों में निर्यात बढ़ा, जबकि तिलहन, खली, चाय, काजू और फल-सब्जियों सहित कई उत्पादों में गिरावट देखी गई।
अनाज के निर्यात में सबसे तेज बढ़ोतरी
वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल से सितंबर अवधि में अन्य अनाजों के निर्यात में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। इनका निर्यात पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 13 करोड़ डॉलर से बढ़कर 27.7 करोड़ डॉलर हो गया। यह करीब 113.8 प्रतिशत की वृद्धि है।
सितंबर महीने में भी अन्य अनाजों का निर्यात सालाना आधार पर 49.9 प्रतिशत बढ़कर 3.9 करोड़ डॉलर रहा। यह आंकड़ा इस श्रेणी में निर्यात की मजबूत गति को दर्शाता है।
मांस, डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों की विदेशों में मांग बढ़ी
मांस, डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों के निर्यात में भी अच्छी वृद्धि दर्ज की गई। अप्रैल-सितंबर 2026 के दौरान इन उत्पादों का निर्यात 42 प्रतिशत बढ़कर 3.9 अरब डॉलर पहुंच गया। पिछले वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 2.745 अरब डॉलर था।
सितंबर में इन उत्पादों का निर्यात 35.2 प्रतिशत बढ़कर 76.8 करोड़ डॉलर रहा। इस श्रेणी में हुई बढ़ोतरी ने कृषि और खाद्य उत्पादों के निर्यात को मजबूती दी।
समुद्री उत्पादों के निर्यात में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला। छह महीने की अवधि में इनका निर्यात 13.2 प्रतिशत बढ़कर 4.5 अरब डॉलर हो गया। सितंबर में समुद्री उत्पादों की विदेशी खेप का मूल्य 8.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 85 करोड़ डॉलर रहा।
चावल और कॉफी के निर्यात में सुधार, चाय पीछे रही
प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की कुछ श्रेणियों में भी वृद्धि दर्ज की गई। अनाज से बने प्रसंस्कृत उत्पादों और अन्य विविध प्रसंस्कृत वस्तुओं का निर्यात अप्रैल-सितंबर के दौरान 7.2 प्रतिशत बढ़कर 1.767 अरब डॉलर रहा। वहीं, कॉफी का निर्यात 3.6 प्रतिशत बढ़कर 1.087 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
चावल के निर्यात में भी सीमित सुधार देखने को मिला। अप्रैल-सितंबर अवधि में चावल का निर्यात 2.5 प्रतिशत बढ़कर 5.776 अरब डॉलर रहा। सितंबर में इसका निर्यात 4.2 प्रतिशत बढ़कर 96.4 करोड़ डॉलर दर्ज किया गया।
इसके विपरीत, चाय का निर्यात कमजोर रहा। वित्त वर्ष की पहली छमाही में चाय का निर्यात 13.6 प्रतिशत घटकर 45.5 करोड़ डॉलर रह गया। इससे स्पष्ट होता है कि कृषि निर्यात की अलग-अलग श्रेणियों में प्रदर्शन में अंतर बना हुआ है।
तिलहन, खली और बागवानी उत्पादों के निर्यात में गिरावट
कई कृषि उत्पादों के निर्यात में कमी दर्ज की गई। अप्रैल-सितंबर 2026-27 के दौरान तिलहन खली का निर्यात 26 प्रतिशत गिरकर 43.3 करोड़ डॉलर रह गया। सितंबर में इसमें सालाना आधार पर 47.5 प्रतिशत की तेज गिरावट आई और निर्यात 5.8 करोड़ डॉलर दर्ज किया गया।
इसी अवधि में तिलहन का निर्यात 16.2 प्रतिशत घटकर 53 करोड़ डॉलर रहा। फल एवं सब्जियों का निर्यात 9.6 प्रतिशत कम होकर 1.687 अरब डॉलर पर आ गया।
काजू के निर्यात में भी कमजोरी देखने को मिली। छह महीने के दौरान इसका निर्यात 9.8 प्रतिशत गिरकर 13.6 करोड़ डॉलर रहा। सितंबर में काजू के निर्यात में पिछले साल के मुकाबले 39.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
मसालों के निर्यात में अप्रैल-सितंबर के दौरान 5.7 प्रतिशत की कमी आई और यह 2.024 अरब डॉलर रहा। हालांकि, सितंबर में मसालों के निर्यात में 4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह अंतर बताता है कि किसी एक महीने का प्रदर्शन और छह महीने का कुल रुझान अलग हो सकता है।
उर्वरक आयात में 30.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी
आयात के आंकड़ों में उर्वरक सबसे प्रमुख श्रेणियों में शामिल रहा। वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-सितंबर अवधि में उर्वरकों का आयात 30.2 प्रतिशत बढ़कर 10.045 अरब डॉलर हो गया। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका मूल्य 7.718 अरब डॉलर था।
हालांकि, सितंबर महीने में उर्वरक आयात का रुझान इसके विपरीत रहा। इस महीने आयात सालाना आधार पर 22.2 प्रतिशत घटकर 1.839 अरब डॉलर दर्ज किया गया। यानी छह महीने की कुल अवधि में मजबूत वृद्धि के बावजूद सितंबर में आयात कम रहा।
वनस्पति तेल, दाल और कपास का आयात भी बढ़ा
वनस्पति तेल के आयात में अप्रैल-सितंबर के दौरान 11.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 11.148 अरब डॉलर तक पहुंच गया। सितंबर में इसका आयात 13 प्रतिशत बढ़कर 1.968 अरब डॉलर रहा।
दालों के आयात में भी तेजी आई। पहली छमाही में दालों का आयात 36.8 प्रतिशत बढ़कर 1.411 अरब डॉलर हो गया। वहीं, फल एवं सब्जियों का आयात 29.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2.183 अरब डॉलर दर्ज किया गया।
कच्चे कपास और कपास के कचरे के आयात में सबसे तेज बढ़ोतरी वाली श्रेणियों में से एक का रुझान दिखाई दिया। अप्रैल-सितंबर अवधि में इसका आयात 63 प्रतिशत बढ़कर 1.103 अरब डॉलर हो गया। सितंबर में यह वृद्धि और अधिक रही तथा आयात 80.9 प्रतिशत बढ़कर 30.1 करोड़ डॉलर पहुंच गया।
क्या संकेत देते हैं व्यापार के ये आंकड़े?
सितंबर 2026 के व्यापार आंकड़े भारत के कुल निर्यात में वृद्धि के साथ कृषि क्षेत्र में अलग-अलग रुझानों को सामने रखते हैं। अनाज, मांस, डेयरी, पोल्ट्री और समुद्री उत्पादों के निर्यात में बढ़ोतरी हुई, जबकि कई पारंपरिक कृषि उत्पादों में गिरावट दर्ज की गई।
दूसरी ओर, उर्वरक, वनस्पति तेल, दाल और कपास के आयात में वृद्धि हुई। इन आंकड़ों से आयात-निर्यात की बदलती तस्वीर सामने आती है, लेकिन किसी एक श्रेणी में वृद्धि या गिरावट के कारणों की पुष्टि के लिए उत्पादवार मांग, कीमतों और व्यापार से जुड़े अन्य आंकड़ों का विश्लेषण आवश्यक होगा।
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Prominent Journalist Amritpal Singh
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