जैन धर्म के सिद्धांत आत्मचिंतन, संयम, करुणा और अनुशासित जीवन-पद्धति के लिए प्रेरित करते हैं: लोक सभा अध्यक्ष
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लोक सभा अध्यक्ष ने इंदौर में श्रावक संस्कार शिविर को संबोधित किया
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इंदौर, 22 सितंबर 2026: लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने आज कहा कि संतों की उपस्थिति, ज्ञान, तपस्या और आध्यात्मिक अनुशासन समाज को आध्यात्मिक शक्ति के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तन की प्रेरणा भी प्रदान करते हैं।

श्री बिरला इंदौर की अपनी एक दिवसीय यात्रा के दौरान सकल दिगंबर जैन धर्म प्रभावना समिति द्वारा परम पूज्य मुनि श्री 108 सुधासागर जी महाराज के पावन चातुर्मास के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर श्री बिरला ने कहा कि पूज्य मुनि श्री 108 सुधासागर जी महाराज ने विभिन्न राज्यों की यात्रा कर अपने ज्ञान, तपस्या और साधना के माध्यम से लोगों का मार्गदर्शन किया है तथा उन्हें जीवन में सार्थक मार्ग दिखाया है। उन्होंने कहा कि गुरुदेव के ज्ञान का प्रकाश भारत और विदेशों में रहने वाले लाखों लोगों के जीवन को परिवर्तित कर रहा है। गुरुदेव जहां भी जाते हैं, वहां की धरती आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो जाती है और उनकी उपस्थिति तथा मार्गदर्शन शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, गौ-संरक्षण, धार्मिक संस्थाओं तथा समाज सेवा के अन्य क्षेत्रों में पहल के लिए प्रेरणा प्रदान करते हैं।

गुरुदेव के आशीर्वाद और मार्गदर्शन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए श्री बिरला ने कहा कि वे उनके लिए निरंतर प्रेरणा का स्रोत रहे हैं और आगे बढ़ने के लिए उन्हें ऊर्जा तथा दिशा प्रदान करते रहे हैं।
चातुर्मास को आध्यात्मिक चिंतन और आत्मनिरीक्षण का महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए श्री बिरला ने कहा कि संतों का सान्निध्य व्यक्ति को ठहरकर अपने भीतर झांकने, अपने विचारों और आचरण का परीक्षण करने तथा जीवन में नई दिशा प्राप्त करने का अवसर देता है।
इंदौर और मालवा क्षेत्र के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए श्री बिरला ने कहा कि मालवा आध्यात्मिकता, धर्म और संस्कृति की समृद्ध विरासत वाला क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि चातुर्मास के दौरान पूज्य मुनि श्री 108 सुधासागर जी महाराज की इंदौर में उपस्थिति ने यहां गहन आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण निर्मित किया है और श्रद्धालुओं को नई प्रेरणा प्रदान की है। श्रावक संस्कार शिविर में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हजारों श्रावक गुरुदेव के आशीर्वाद और उपदेश प्राप्त करने के लिए एकत्रित हुए हैं, जबकि भारत और विदेशों में लाखों लोग विभिन्न माध्यमों के जरिए उनके ज्ञान, प्रवचनों और संदेश से लाभान्वित हो रहे हैं।
श्री बिरला ने कहा कि गुरुदेव का प्रत्यक्ष आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्राप्त होना एक विशेष सौभाग्य है। जहां लाखों लोग अपने घरों से उनके प्रवचनों को सुनते और देखते हैं, वहीं श्रावक संस्कार शिविर में उपस्थित लोगों को उनके प्रत्यक्ष सान्निध्य और आशीर्वाद का अनुभव करने का अवसर प्राप्त हो रहा है।

जैन दर्शन की प्रासंगिकता का उल्लेख करते हुए श्री बिरला ने कहा कि संतों की शिक्षाएं केवल आध्यात्मिक ज्ञान ही प्रदान नहीं करतीं, बल्कि जीवन जीने का मार्ग भी दिखाती हैं। जैन धर्म के सिद्धांत आत्मचिंतन, तपस्या, संयम, करुणा और अनुशासित जीवन-पद्धति के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि इन मूल्यों का महत्व केवल जैन समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि ये संपूर्ण समाज और मानवता के लिए प्रासंगिक हैं। ऐसे समय में जब समाज और विश्व में कटुता तथा तनाव उत्पन्न होते हैं, अहिंसा, करुणा, सहिष्णुता और संयम के सिद्धांत विशेष महत्व रखते हैं।
इंदौर में आयोजित पूज्य मुनि श्री 108 सुधासागर जी महाराज के पावन चातुर्मास कार्यक्रम में उनके दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त करने तथा सकल दिगंबर जैन धर्म प्रभावना समिति के इस आध्यात्मिक आयोजन में सहभागिता का पुण्य अवसर प्राप्त हुआ।
संतों का सान्निध्य जीवन की आपाधापी में कुछ क्षण ठहरकर स्वयं को देखने की दृष्टि देता है। चातुर्मास साधना, संयम और आत्मचिंतन की उस भारतीय संत परंपरा का स्मरण कराता है, जिसमें मनुष्य की सबसे बड़ी यात्रा अपने भीतर की यात्रा मानी गई है। जैन दर्शन के अहिंसा, अनेकांत और अपरिग्रह जैसे जीवन-मूल्य हमें सिखाते हैं कि विचारों में विनम्रता, वाणी में मधुरता, व्यवहार में करुणा और जीवन में संयम हो।
संतों की वाणी तभी सार्थक होती है, जब वह हमारे आचरण का हिस्सा बने। पूज्य मुनि श्री 108 सुधासागर जी महाराज के तप, त्याग और साधना से प्रेरणा लेकर हम अपने जीवन को अधिक संवेदनशील, संयमित और सार्थक बनाने का संकल्प लें, यही इस पावन अवसर की सबसे बड़ी सार्थकता है।
पूज्य संतों के चरणों में श्रद्धापूर्वक नमन एवं सभी के सुख, शांति और मंगल की कामना।जय जिनेंद्र।
— Om Birla (@ombirlakota) September 22, 2026
मुनिश्री क्षमा सागर जी महाराज के शब्दों को स्मरण करते हुए श्री बिरला ने इस बात पर जोर दिया कि व्यक्ति का आचरण, व्यवहार, विचार और वाणी दूसरों के लिए पीड़ा का कारण न बने, यह सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यही जैन दर्शन की मूल भावना को प्रतिबिंबित करता है, जो वाणी में संयम, आचरण में करुणा और दूसरों के साथ व्यवहार में सहिष्णुता का आह्वान करता है। उन्होंने कहा कि ये सिद्धांत सार्वजनिक और सामाजिक जीवन में विशेष रूप से प्रासंगिक हैं। जब भी सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्ति संतों के सान्निध्य में आते हैं, उन्हें अपने आचरण, वाणी और अपनी जिम्मेदारियों के प्रति दृष्टिकोण पर आत्मचिंतन करने का अवसर मिलता है।
उन्होंने कहा कि संयमित वाणी, कर्म में करुणा और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता सार्वजनिक जीवन के साथ-साथ पूरे समाज के लिए महत्वपूर्ण मूल्य हैं। संतों से प्राप्त मार्गदर्शन निरंतर आत्मचिंतन और सकारात्मक परिवर्तन का अवसर प्रदान करता है।
इस अवसर पर मध्य प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय भी उपस्थित थे।
Prominent Journalist Amritpal Singh
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As a senior journalist and Director of Chardikala Time TV, he has played a vital role in strengthening Punjabi media at a global level.










